योगी ने दिया 18 वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा

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  • अधिकारों के लिए 100 वर्षों से लड़ रहे हजारों वनटांगिया परिवारों की लड़ाई को मिला मुकाम
  • 3779 वनटांगिया परिवारों को भूमि के पट्टे और 98 लोगों को विभिन्न योजनाओं के प्रमाणपत्र सौंपे

शिवरतन कुमार गुप्ता ‘राज़’

महराजगंज। नए साल की शुरुआत वनटांगियों के लिए बहुत ही खास रही। सैकड़ों वर्षों से सरकारी योजनाओं से वंचित वनवासी जीवन व्यतीत कर रहे लोगों के अरमानों को सोमवार को मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने पंख लगा दिए। नववर्ष की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पनियरा ब्‍लॉक के वनटांगिया ग्रामसभा चंदन चाफी में 18 वनटांगिया ग्रामसभाओं को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर की। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए पिछले 100 वर्षों से लड़ रहे हजारों वनटांगिया परिवारों की लड़ाई को आज मुकाम मिल गया है। उन्होंने 3779 वनटांगिया परिवारों को भूमि के पट्टे भी प्रदान किए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने 98 लोगों को विभिन्न योजनाओं का प्रमाणपत्र भी वितरित किया।

जिले के चंदन चाफी बरहवा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘राज्य सरकार की प्राथमिकता इन गाँवों का विकास सुनिश्चित करना है,  जिन्हें आजादी के 70 वर्ष बाद भी लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। राजस्व गाँव में सम्मिलित होने से इन जनजातीय लोगों को विकास की योजनाओं का लाभ मिलेगा।’ योगी ने कहा कि दूसरे चरण में अन्य 47 वनटांगिया बहुल गाँवों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिल जाएगा। इस प्रकार प्रदेश में कुल 65 वनटांगिया राजस्व गाँव हो जाएंगे। उनकी सरकार प्रदेश के 1625 अन्य गाँवों को भी राजस्व ग्राम की फेहरिस्त में शामिल करने की दिशा में अग्रसर है।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को चेताया कि वनटांगिया निवासियों को अविलम्ब उन सभी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए जो राजस्व ग्रामसभाओं को मिलता है। इसमें अगर कहीं कोई लापरवाही हुई तो अधिकारी बख्शे नही जाएंगे तथा अगर कोई धनउगाही करने का प्रयास करेगा तो उसकी जगह जेल में होगी। उन्होंने कहा कि इन गांवों में बिजली, सड़क, शिक्षा, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। सड़क बनाने पर वन विभाग के लोगों द्वारा मुकदमा दर्ज करा दिया जाता था। विद्यालय खोलने पर भी लोग उत्पीड़न का शिकार होते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब इन गांवों में भी सामान्य गांवों की तरह सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां विद्यालय खुलेंगे, आंगनबाड़ी केंद्रों का विकास होगा। विद्युतीकरण के साथ सभी को पक्का मकान भी मिलेगा। पात्र व्यक्ति पेंशन योजना से लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री ने जनपद वासियों को नए साल की शुभकामना भी दी। इस दौरान मंच पर सांसद पंकज चौधरी, जगदम्बिका पाल, विधायक ज्ञानेन्द्र सिंह, जयमंगल कन्नौजिया, प्रेम सागर पटेल, अमन मणि त्रिपाठी, बजरंग बहादुर सिंह, मंडलायुक्त अनिल कुमार, जिलाधिकारी वीरेन्द्र कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक आरपी सिंह के साथ हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

योगी के कार्यक्रम के दौरान ही जंगल से निकलीं लकडि़यां

जंगल से साइकिल पर जलौनी लकडि़यां ले जाता एक लकड़हारा

इसे एक संयोग कहें या प्रशासनिक अमले की चूक कि जिस पनियरा क्षेत्र के बरहवा चन्दन चाफी के जंगल में मुख्यमंत्री योगी वनटांगिया परिवारों के बीच राजस्व गांव का प्रमाणपत्र वितरण कर रहे थे, उसी जंगल से जलौनी लकड़ियां भी उसी वक्त बेरोक-टोक निकल रही थीं। the2ishindi.com के रिपोर्टर ने जंगल से साइकिल पर ले जाई जा रही जलौनी लकड़ियों को अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। बताते चलें कि इन जंगलों से लकड़ियों की निकासी कोई नई बात नहीं है। इन जलौनी लकड़ियों की ठंढ के दिनों में कस्बाई बाजारों में खासी मांग है। एक साइकिल पर लदी लकडि़यों के 600-800 रुपये तक मिल जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक लकड़हारे ने बताया कि विभाग के साहब लोगों को ‘सुविधा’ दी जाती है, तब लकड़ी जंगल से निकल पाती है।

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