सुरक्षा, व्‍यापार व आतंकवाद पर रूस, भारत और चीन की वार्ता

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नई दिल्‍ली। त्रिपक्षीय विदेश मंत्रियों की पंद्रहवें बैठक के बाद सोमवार को भारत, चीन और रूस ने संयुक्‍त बयान जारी किया है। भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने कहा, मिडल इस्‍ट में राजनीतिक परिदृश्‍य और उत्‍तर अफ्रीका समेत आतंकवाद के मुद्दों पर चर्चा हुई जो विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था को पीछे करने, अवैध तौर पर ड्रग तस्‍करी आदि के लिए विभिन्‍न चुनौतियां हैं।

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को अपने चीनी समकक्ष वांग यी और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय एवं अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बातचीत की। इसके डोकलाम विवाद पर भी चर्चा हुई।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर बताया कि भारत और रूस के सामरिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने की पहल करते हुए सुषमा ने लावरोव के साथ सार्थक बैठक की। दोनों नेताओं के बीच रूस, भारत और चीन त्रिपक्षीय बैठक से पहले आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।यह बैठक अप्रैल में होनी थी, लेकिन तब चीनी विदेश मंत्री ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी थी। डोकलाम विवाद के बाद चीन की ओर से भारत की यह पहली उच्चस्तरीय यात्रा है।

हालांकि एक ओर भारत और चीन के विदेश मंत्री महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए जुटे हैं। इसका मकसद क्षेत्र में शांति बनाए रखना है। वहीं दूसरी ओर डोकलाम पर चीन अपनी दादागिरी दिखाना बंद नहीं कर रहा है। एक बार फिर डोकलाम पर चाल चलते हुए चीनी सैनिकों ने यहां डेरा जमा लिया है। सिक्किम-भूटान-तिब्बत सीमा के पास डोकलाम क्षेत्र में करीब 1600-1800 चीनी सैनिक फिर आ जमे हैं। ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में सर्दियों का सामना करने के लिए चीनी सैनिक हेलीपैड, सड़क, स्टोर और शिविरों को बनाने का काम कर रहे हैं।

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