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अब आरओ के जल से ही होगा महाकाल का अभिषेक : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर में स्थापित शिवलिंग में हो रहे क्षरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अब मंदिर प्रशासन को आठ सुझावों पर अमल करने के लिए हरी झंडी दे दी है, जिनमें शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल की मात्रा तय करना और सिर्फ आरओ से शुद्ध किया जल चढ़ाया जाना शामिल हैं.सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को कुल मिलाकर निम्नलिखित सुझावों पर अमल करने के लिए कहा है.

श्रद्धालु 500 मिलीलिटर से ज्यादा जल नहीं चढ़ाएंगे. चढ़ाया जाने वाला जल सिर्फ RO का होगा. भस्म आरती के दौरान शिवलिंग को सूखे सूती कपड़े से पूरी तरह ढका जाएगा. अभी तक सिर्फ 15दिन के लिए शिवलिंग को आधा ढका जाता था.अभिषेक के लिए हर श्रद्धालु को निश्चित मात्रा में दूध या पंचामृत चढ़ाने की इजाज़त होगी.शिवलिंग पर चीनी पाउडर लगाने की इजाज़त नहीं होगी, बल्कि खांडसारी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा.नमी से बचाने के लिए ड्रायर व पंखे लगाए जाएंगे और बेलपत्र व फूल-पत्ती शिवलिंग के ऊपरी भाग में चढ़ेंगे, ताकि शिवलिंग के पत्थर को प्राकृतिक सांस लेने में कोई दिक्कत न हो.शाम 5 बजे के बाद अभिषेक पूरा होने पर शिवलिंग की पूरी सफाई होगी और इसके बाद सिर्फ सूखी पूजा होगी.अभी तक सीवर के लिए चल रही तकनीक आगे भी चलती रहेगी, क्योंकि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनने में एक साल लगेगा.

दरअसल, उज्जैन की याचिकाकर्ता सारिका गुरु द्वारा दायर की गई याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की देहरादून, भोपाल और इंदौर की टीमें गठित कर महाकाल शिवलिंग की क्षरण की जांच के लिए टीम भेजी थी. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया कि विश्वप्रसिद्ध भस्म आरती में कंडे की भस्म चढ़ाई जाती है, जिससे शिवलिंग का क्षरण हो रहा है. इसके अलावा महाकाल मंदिर के शिवलिंग पर सगातार जो जल चढ़ाया रहा है, उसमें बैक्टीरिया हैं और वह पानी प्रदूषित भी है, इसलिए पानी की मात्रा को कम किया जाए.

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