गोरक्षा के लिए मुस्लिम भी शहीद हुए, इसे किसी धर्म से ना जोड़ें : भागवत

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  • कश्मीर नीति और डोकलाम विवाद से निपटने के लिए आरएसएस प्रमुख ने की मोदी सरकार की तारीफ

नागपुर। शनिवार को शहर के रेशीमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजयादशमी उत्सव मनाया। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा – ‘कल जो मुंबई में दुखद घटना हुई, उसको लेकर सबका मन दुखी है। जीवन में ऐसी बातों का सामना करके आगे बढ़ना पड़ता है।’ उन्होंने डोकलाम मुद्दा, रोहिंग्या मुद्दा, कश्मीर और दुनिया में भारत की मौजूदा स्थिति पर मोदी सरकार के काम और नीतियों की तारीफ की। उन्होंने कहा – ‘70 साल में पहली बार दुनिया का भारत की तरफ ध्यान गया है। सीमा पर हम जवाब दे रहे हैं। डोकलाम विवाद में भी हमने भारतीय गौरव को झुकने नहीं दिया।’

गोरक्षा के नाम पर हिंसा ठीक नहीं

मोहन भागवत ने कहा- ‘गोरक्षा के नाम पर हिंसा करना ठीक नहीं है, जो हिंसा कर रहे हैं उन्हें डरने की जरूरत है। इसे धर्म से नहीं जोड़ा चाहिए। गोरक्षा के काम कई धर्म के लोगों से जुड़े हैं। इनमें मुसलमान भी शामिल हैं। गोरक्षक और गोरक्षा का प्रचार करने वाले मुस्लिम भी हैं, दूसरे संप्रदायों के भी हैं। गाय की रक्षा करने वालों की भी हत्या हुई। यूपी में, जिसमें सिर्फ बजरंग दल वाले नहीं, मुस्लिम भी शहीद हुए। जो गोरक्षा की आड़ में हिंसा करते हैं, कानून उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। गोरक्षकों को परेशान नहीं होना चाहिए, अपना काम करते रहना चाहिए।’

मानवता के नाम पर हम कोई कीमत नहीं चुका सकते

संघ प्रमुख ने कहा – ‘बांग्लादेश की सीमा पर गायों की तस्करी चलती है, घुसपैठ चलती है। मौजूदा वक्त में रोहिंग्याओं की समस्या चल रही है। आखिर उन्हें वहां से क्यों आना पड़ा? दरअसल उनके वहां जिहादियों से संपर्क उजागर हो गए। अगर उन्हें यहां (भारत) बसाया तो न केवल रोजगार पर संकट बनेंगे, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा बढ़ेगा। मानवता के नाम पर हम अपनी मानवता नहीं खो सकते।’

हालात बदले हैं कश्मीर में

भागवत ने कहा, ‘कश्मीर की बात करें तो 2-3 महीने पहले लग रहा था कि वहां क्या होगा, लेकिन जिस तरह वहां आतंकियों का बंदोबस्त हुआ, सेना को पूरी ताकत दे दी गई और आतंकियों की शक्तिधारा को बंद कर दिया गया। हमारा कोई शत्रु नहीं लेकिन अपने से शत्रुता रखने वालों को जवाब दिया है। बीते कई सालों में जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख में विकास हुआ ही नहीं। उनके साथ सौतेला व्यवहार किया गया।’ संघ प्रमुख ने कहा, ‘राज्य शासन-प्रशासन मिलकर कोशिश करें तो कश्मीर समस्या का जल्द हल हो सकता है।’

सरकार को नसीहतें भी

मोहन भागवत ने सरकार को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा – ‘लोगों के उत्थान के लिए गैस सब्सिडी, जनधन जैसी कई योजनाएं चली हैं। हमें यह भी ध्यान होगा कि एक जगह अच्छा करने जाएं तो दूसरी जगह गड़बड़ न हो। दूसरे देशों में इस तरह का चल जाता है, लेकिन भारत विविधताओं का देश है। हमको ऐसा आर्थिक तंत्र चाहिए तो बड़े-छोटे व्यापारी, खुदरा व्यापारी सबका भला करे। जब तक हम अपना प्रतिमान नहीं बना लेते, तब तक हमें दुनिया के साथ चलना होगा।’ उन्‍होंने कहा, ‘सरकार को हर मुद्दे पर लोगों का फीडबैक लेना चाहिए। उन्हें सुनना चाहिए, ताकि काम को और बेहतर और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके।’

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