सोशल मैसेज विद कॉमेडी के लिए देखें ‘पोस्टर ब्वायज’

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  • बेहतरीन डॉयलाग से सजी है फिल्‍म, सरकारी कामकाज पर तगड़ा कटाक्ष

लखनऊ। काफी समय बाद सनी और बॉबी देओल बड़े पर्दे पर लौटे हैं। सच्ची घटनाओं पर आधारित मराठी फिल्म ‘पोस्‍टर ब्‍वायज़’ के हिंदी रीमेक में अपनी इमेज को बरकरार रखने की कोशिश में दिख रहे हैं। श्रेयस तलपड़े ने एक्टिंग के साथ फिल्‍म में डायरेक्शन का काम भी किया है।

फिल्म की कहानी उत्तर भारत के एक गांव पर आधारित है जिसमें स्थानीय गुंडा (श्रेयस), सेनानिवृत्त सेना अधिकारी जगावर चौधरी (सनी) और स्कूल टीचर विनय (बॉबी) खुद को नसबंदी के एक पोस्टर पर देखकर हैरान रह जाते हैं। सरकार की एक गलती की वजह से तीनों की जिदंगी बदल जाती है। फिल्म में प्रशासन, समाज और सरकार के ऊपर भी कटाक्ष किया गया है। पोस्‍टर छपने के बाद इन तीनों किरदारों में से एक की शादी टूट जाती है और दूसरे की पहले से तय शादी कैंसल हो जाती है। इसके बाद ये तीनों ही पीड़ित पुरुष इस बात की जांच करने में जुट जाते हैं कि आखिर उनकी तस्वीर पोस्टर पर कैसे छपी। इस दौरान फिल्म में प्रशासन की विसंगतियां सामने आती हैं। इस दौरान ये तीनों ही लोग कई परेशानियों में घिर जाते हैं जिसे बड़े ही कॉमिक तरीके से फिल्म में दिखाया गया है।​

निर्देशक के तौर पर श्रेयस ने अपने किरदारों को ज्‍यादा फनी बनाने में मेहनत नहीं की है। यह आम आदमी की कहानी है, जो असामान्य परिस्थिति में फंस जाते हैं और उससे निपटने की कोशिश करते हैं। उनके इस ट्रॉमा से आप खुद को निश्चित तौर पर कनेक्ट कर पाएंगे। बॉलीवुड कॉमेडी को फॉलो ना करते हुए तलपड़े ने अपेन सब्जेक्ट को काफी गंभीरता से विचार करने वाला बनाया है। फिल्म के लेखक को क्रेडिट देना चाहिए जिसने हिंदी रीमेक में स्थानीय भाषा को डाला है। सनी देओल अब अपने समकालीन ऐक्टर्स के मुकाबले बूढ़े दिखने लगे हैं। कहा जा सकता है कि श्रेयस ने फिल्म में कुछ भी नया नहीं किया है।

पोस्टर ब्‍वायज फिल्म को लिखने वाले समीर पाटिल ने उत्तरी भारत के परिवेश को बेहतरीन ढंग से दर्शाया है और स्थानीयता को शानदार तरीके से पेश किया है। इसके लिए उन्हें पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए। डायलॉग रायटर परितोष पेंटर ने कलाकारों के हिसाब से डायलॉग लिखकर बेहतरीन काम किया है। फिल्म में बलवंत नाम का एक किरदार है, जिसे कोई एक जोरदार आवाज में बुलाता है, ‘बलवंत राय के कुत्ते’। इसके अलावा बॉबी देओल के किरदार ने फिल्म में अपने फोन के रिेंगटोन पर सोल्जर फिल्म के गाने को सेट कर रखा है।

फिल्म में कुछ एक सीन्स कमाल के बन पड़े हैं। आजकल जो कुछ भी हम बाकी फिल्मों में देख रहे हैं, उनके मुकाबले कॉमेडी का स्तर इस फिल्म में काफी बेहतर है। सीधे सादे शब्दों में कहें तो लिखावट पर ध्यान दिया गया है और डायलॉग जोकि कॉमेडी फिल्मों में जान होते हैं, उनके ऊपर बहुत मेहनत की गई है।

जब श्रेयस पहली बार रिकवरी करने जाते हैं तो उस सीन में ठहाके लगाने का पूरा मौका मिलता है। इसके अलावा जब अश्विनी कालसेकर को बॉबी रात में श्रेयस की प्रेमिका की तबीयत खराब होने की वजह से उनको चेकअप के लिए लेकर आते हैं, तब उसमें भी काफी गुदगुदी मिलती है। देखकर अच्छा लगता है कि सनी भी जमाने के साथ कदम से कदम मिला रहे हैं। उनके बहुचर्चित डायलॉग्स को भी एक अलग अंदाज में फिल्म में पिरोया गया है।

अश्विनी कालसेकर डॉक्टर की भूमिका में हैं और उनकी तारीफ जितनी भी की जाए कम होगी। भले ही पूरी फिल्म में उनका स्क्रीन अपीयरेंस 15 मिनट का ही है, लेकिन जब भी वो पर्दे पर आती हैं तो मजा आ जाता है। इसके अलावा बॉबी की पत्नी की भूमिका में हैं समीक्षा भटनागर जिन्‍होंने एक तेजतर्रार पत्नी का रोल बखूबी निभाया है।

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