Sangeeta gosh

सोशल मीडिया में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं : संगीता घोष

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  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सराहाकहा – अब आसानी से महिलाओं को तलाक देना संभव नहीं होगा  

स्टार प्लस अपने दर्शकों के लिए एक नया शो ‘रिश्तों का चक्रव्यूह’ लेकर आ चुका है। शाही पृष्ठभूमि पर आधारित इस शो की कहानी एक अमीर औद्योगिक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें माँ सतरूपा और उसकी बेटी अनामी के बीच टकराव को दिखाया गया है। शो को और रोमांचक बनाने के लिए इसमें एक नए किरदार की एंट्री हुई है, जिसका नाम है सुधा। सुधा की भूमिका निभा रही हैं टीवी एक्ट्रेस संगीता घोष, जिन्होंने 10 साल पहले स्टार प्लस शो ‘देश में निकला होगा चाँद’ में पम्मी की भूमिका निभाई थी। सतरूपा और अनामी के बीच कटु रिश्तों में सुधा एक नया ट्विस्ट लेकर आएंगी। सुधा इस शो में बंगाली अवतार में हैं। शो के बारे में 23 अगस्त को लखनऊ के ताज विवांता में एक प्रेस कांफ्रेस रखी गई। इस मौके पर the2is.com की दीपाली अग्रहरि ने संगीता घोष से की बात :

देश में निकला होगा चाँद में पॉजिटिव रोल के बाद अब नेगेटिव रोल कर रही हैं। इसके लिए आप किसे फॉलो कर रही हैं?

मुझे नेगेटिव रोल पसंद है हालांकि रियल लाइफ में इसके बिलकुल विपरीत हूँ। मेरी इंस्पिरेशन श्रीदेवी हैं। बॉलीवुड फिल्म‘जुदाई’ में उनका नेगेटिव रोल मुझे काफी अच्छा लगा। वैसे भी जो रोल आपको दिए जाते हैं, वो खुद को कन्विंसिंग लगने चाहिए, फिर चाहे वह पॉजिटिव हो या नेगेटिव। टॉप के हीरो और हीरोइन भी नेगेटिव रोल करते हैं।

शो में सुधा का किरदार देवदास फिल्म की सुधा से प्रेरित है, इस बात में कितनी सच्चाई है?

सुधा का कैरेक्टर तो नहीं, लेकिन हाँ फिल्म से सुधा का लुक जरूर उससे प्रेरित है। जब मेरे सामने स्क्रिप्ट आई तो मैं इसके जरिए इंडियन ब्यूटी को ही सामने लाना चाहती थी। जैसे बंगाली स्टाइल में साड़ी पहनना, लम्बे बाल, न ज्यादा मोटी और न ज्यादा पतली, बस हेल्‍दी सी लड़की।

क्या शो में आप लगातार दिखेंगी या बीच–बीच में?

अभी शुरुआत में थोड़ा कम दिखूंगी लेकिन नवरात्रि के बाद से शो में मैं लगातार दिखूंगी।

सोशल मीडिया से आपका न जुड़ने का कारण?

सोशल मीडिया में मैं बहुत कम रहती हूँ क्योंकि एक तो मैं बहुत लेज़ी हूँ और दूसरा मेरे पास इतना कुछ है ही नहीं लोगों से शेयर करने के लिए। हर समय लाइक्स और कमेंट्स देना मुझे पसंद नहीं। हालाँकि काफी लोग एक्टिव रहते हैं सोशल मीडिया पर, लेकिन मैं अब भी उनसे 10 साल पीछे हूँ। सोशल मीडिया बहुत टाइम टेकिंग भी है।

अपने काम और परिवार के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं?

मेरी लाइफ में मेरी फैमिली और दोस्त बहुत महत्वपूर्ण हैं। काम ख़त्‍म होते ही मैं अपनी फैमिली के पास भागती हूँ।

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आप कैसे देखती हैं?

मुस्लिम महिलाएं तो पहले से ही लड़ रही थीं तीन तलाक के मुद्दे को लेकर। मेरा मानना है कि इस फैसले से महिलाओं को काफी राहत मिलेगी, नहीं तो बहुत आसानी से औरतों को तलाक दे दिया जाता था। यह अब आसान नहीं होगा, तो ये बहुत अच्छा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने अच्छा वर्डिक्ट दिया है और हम सभी को इसे स्वीकारना चाहिए।

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