गड़बड़ नींद है बहुत खतरनाक

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आज के व्यस्त जीवन में कम नींद लेना और नींद न आना दोनों स्थितियां बीमारी का लक्षण हैं। इस बीमारी का शिकार आज दुनिया का हर दूसरा इंसान है। अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज नहीं किया गया तो नतीजे घातक हो सकते हैं। स्लीपिगं डिस्‍ऑर्डर और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया नामक यह बीमारी विश्व में बहुत ही तेजी से फैल रही है। the2is.com के लिए शिवम अग्निहोत्री की रिपोर्ट :

जिस तरह शरीर के लिए संतुलित खाना-पीना जरूरी है, उसी तरह संतुलित नींद भी जरूरी है। खाना कम या ज्यादा और बेसमय खाना शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। इसी तरह समय से न सोना, कम सोना या भरपूर न सोना शरीर को बहुत अधिक प्रभावित करता है। दिनभर के थके शरीर की कोशिकाओं को रिपेयर या आराम देने के लिए कम से कम 6 से 8 घण्टे सोना आवश्यक है। पर्याप्‍त नींद शरीर को रोगों से दूर रखती है और शरीर के विकास में मदद करती है। गर्भवती महिलाओं को कम से कम 8 से 10 घण्टे सोना चाहिए, जिससे उनके स्‍वास्‍थ्‍य और गर्भ में पल रहे बच्‍चे पर कोई दुष्‍प्रभाव न पड़े। कम नींद मस्तिष्क के लिए ज्यादा हानिकारक मानी जाती है। कम सोने से मस्तिष्क की कोशिकाएं थकान की वजह से सामान्य तौर पर कम काम करती हैं, जिससे शरीर में लगातार थकावट बनी रहती है। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। मानसिक प्रवृत्ति धीरे-धीरे बदलने लगती है।

 नींद संबंधी समस्या बढ़ती ही जा रही

दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई या कोई भी अन्य शहर हो, लोगों में नींद संबंधी समस्याएँ बढ़ती ही जा रही हैं। नींद न आना, पूरी रात सोने के बावजूद थकावट बने रहना, हर वक्त नींद आना, खर्राटे, सोते वक्त झटके में नींद टूट जाना – ये सब समस्याएँ इस कदर बढ़ गई हैं – खासकर युवाओं और माध्यम आयु वर्ग में कि हर शहर में इन बीमारियों की स्पेशल क्‍लीनिक्स और डॉक्टर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। लखनऊ में ही कम से कम दो दर्जन डॉक्टर और अनेक क्‍लीनिक्स नींद सम्बन्धी दिक्कतों का विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध करा रहे हैं। लखनऊ में मेडिकल युनिवर्सिटी या दिल्ली के एम्स की स्लीप क्‍लीनिक हो, महीनों की वेटिंग के बाद मरीज को नंबर मिलता है।

श्वास नली से जुड़ा है मामला

खर्राटे, सोते समय सांस रुकना, झटके से नींद टूटना यह सब गले में श्वास नली के ऊपर के हिस्से में गड़बड़ी से होता है। इसके अलावा, नाक की हड्डी की गड़बड़ी भी बड़ा कारण है। समस्या का इलाज दवा, नोज क्लिप, माउथ पीस, सर्जरी – इनमें से कुछ भी हो सकता है।

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया

तनाव, मोटापा, अल्कोहल, या किसी बीमारी की वजह से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया हो जाती है। सोते-सोते अचानक सांस में रुकावट हो जाए और चौंक कर नींद टूट जाए तो इसे फ्रेग्मेण्टेड स्लीप एप्निया कहते है। ये स्थितियां स्लीपिंग डिस्‍ऑर्डर का मरीज बनाती हैं। झटके से नींद क्यों टूट रही है, खर्राटे क्यों आ रहे हैं, आराम की नींद क्यों नहीं आती, यह सब पता करने के लिए पोलीसेमनोग्राफी (स्लीप स्टडी) की जाती है।

स्लीप एप्निया के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाला सीपीएपी उपकरण

स्लीप एप्निया का उपचार

जीवन शैली में परिवर्तन कर या माउथपीस की सहायता से स्‍लीप एप्निया को दूर किया जा सकता है, लेकिन जिन लोगों को गंभीर स्लीप एप्निया है, उन्हें साँस लेने के उपकरण या सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

जीवन शैली में परिवर्तन

माइल्‍ड स्लीप एप्निया में दैनिक गतिविधियों या आदतों में कुछ बदलाव लाभ पहुंचा सकते हैं। धूम्रपान, शराब और दवाओं का सेवन श्वास नली में अवरोध पैदा करता है। मोटापा और वजन घटाना चाहिए।

माउथपीस

माउथपीस

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया अक्सर गले के नरम ऊतकों के कमजोर होने या मुख के वायुमार्ग में रुकावट के कारण होता है। ऐसी स्थिति में माउथपीस सांस लेने में मदद करता है। माउथपीस उपकरण मुंह के अंदर रखा जाता है।

श्वास डिवाइस

प्रतिरोधी स्लीप एप्निया के लिए सीपीएपी (कांटीन्यू पॉजीटिव एयरवे प्रेशर) सबसे सामान्य उपचार है। एक मशीन से हवा का दबाव बनाया जाता है जो श्‍वास नली को खुला रखने में सहायता करता है। आमतौर पर सीपीएपी उपकरण लगाने के लिए एक तकनीशियन की जरूरत पड़ती है।

क्‍या कहते हैं डॉक्टर

केजीएमयू के डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि कम व अधिक सोने से हमारे शरीर में अनेक तरह की बीमरियां हो जाती हैं। कम सोने से मस्तिष्क की एक्टीविटी कम हो जाती है और इससे डिप्रेशन व चिड़चिड़ापन बढ़ता है। 6 से 8 घण्टे नींद जरूर ही लेना चाहिए। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया पूरे देश में बहुत अधिक तेजी से फैल रही है। ‘स्लीप स्टडी’ जांच केजीएमयू में मात्र 600 रुपये में की जाती है।

केजीएमयू के डॉ. मनोज पाण्डेय ने बताया कि कम नींद लेने से स्ट्रेस व कई तरह की मानसिक बीमारियां बढ़ रही है। इसी तरह ज्यादा सोने वालों में भी कुछ न कुछ बीमारियां होती है। उनका कहना है कि बिना किसी चिकित्सक की सलाह के नींद की गोलियों का सेवन नहीं करना चाहिए।

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