sugar free

आर्टीफिशियल स्‍वीटनर हैं आपकी जान के दुश्‍मन

142 0
  • आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है शुगर फ्रीका अधिक इस्‍तेमाल

 हॉर्मोंस का असंतुलन, मोटापा और अनियंत्रित जीवनशैली डायबिटीज का प्रमुख कारण मानी जाती है। डायबिटीज से पीडि़त अधिकतर लोग डाइट में शुगर फ्री (आर्टीफिशियल स्वीटनर्स) का यूज करते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा मात्रा में लेने पर यह कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम भी पैदा करते हैं। प्रस्तुत है the2is.com के लिए शिवम अग्निहोत्री की रिपोर्ट :

कनाडा के मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि 406,000 लोगों के अध्‍ययन के बाद पता चला कि जो लोग चीनी के स्थान पर आर्टीफिशियल स्वीटनर्स का लगातार इस्तेमाल करते हैं, उनमें हृदय संबंधी समस्‍याएं, रक्तचाप व स्ट्रोक की घटनाएं और वजन बढ़ने की समस्याएं पाई गईं। शोध में पाया गया कि शुगर फ्री के नियमित उपभोग से टाइप 2 मधुमेह और उच्च रक्तचाप की आशंका अधिक हो जाती है। डायबिटीज मरीज अगर लंबे समय तक इसका सेवन करते हैं तो दिक्कत बढ़ सकती है, इसलिए बिना डॉक्टरी सलाह के ऐसा न करें। PLOS जर्नल की रिसर्च के अनुसार आर्टीफिशियल शुगर से मिलने वाली हर 150 कैलोरी बॉडी पर डायबिटीज का खतरा 1 प्रतिशत और बढ़ा देती है। साथ ही इससे किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

डॉक्‍टरों का कहना है कि शुगर बॉडी के लिए जरूरी नहीं होती है। अगर लेना ही चाहते हैं तो दिनभर में इसकी 30 से 50 ग्राम मात्रा ले सकते हैं। शुगर के रोगियों को अक्सर मीठा खाने को मना किया जाता है, लेकिन वे खाने- पीने की चीजों में स्वाद के लिए शक्कर की जरूरत महसूस करते हैं। इसी को ध्‍यान में रखकर शुगर फ्री गोलियों को बनाया गया है। आजकल विज्ञान ने ऐसे अनेक कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ उपलब्ध कराए हैं, जो स्वाद में तो मीठे होते हैं लेकिन इनमें कैलोरी नहीं होती। ये मीठे होते हुए भी शुगर के मरीजों में शुगर नहीं बढ़ाते हैं इसलिए इन्‍हें आर्टीफिशियल स्वीटनर्स कहा जाता है। आर्टीफिशियल स्वीटनर्स के रूप में बाजार में कई प्रोडक्‍ट उपलब्ध हैं।

क्‍या है शुगर फ्री या आर्टीफिशियल स्‍वीटनर

आर्टीफिशियल स्‍वीटनर या जिन्‍हें शुगर फ्री कहते हैं, वे मानव-निर्मित रसायन होते हैं जिन्हें मानव शरीर द्वारा पचाया नहीं जा सकता। आर्टीफिशियल स्‍वीटनर पांच प्रकार के होते हैं – एस्पारटेम, एसीसल्फेम, सैक्रीन, सुक्रालोज़ और स्‍टीविया। सुक्रालोज़ को शक्कर में रासायनिक बदलाव कर बनाया जाता है। इस रासायनिक बदलाव के फलस्वरूप यह स्वाद में शक्कर से 600 गुना मीठा हो जाता है और ये आंतों में भी अवशोषित नहीं होता है। इसी तरह एस्पारटेम मिथियोनीन तथा फिनाइल एलेनीन नामक एमीनो एसिड के मिलने से बनता है। हमारे भोजन में जो प्रोटीन होते हैं, वे भी पाचन के बाद एमीनो एसिड में बदलते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एस्पारटेम जिन पदार्थों से बना है, वे तो वैसे भी हमारे दैनिक भोजन का हिस्सा हैं, परंतु एस्पारटेम को अधिक गर्म करने से इसकी मिठास प्रभावित होती है, अतः एस्पारटेम को गर्म नहीं करना चाहिए। यह शक्‍कर से 200 गुना मीठा होता है।

इसी प्रकार बाजार में उपलब्ध सैक्रीन शक्‍कर से 300 गुना, एसीसल्फेम के 300 गुना, साइक्लामेट 30-50 गुना अधिक मीठा होता है। स्टीविया नामक शुगर फ्री भी घातक हो सकता है। इससे उन लोगों में एलर्जी हो जाती है जिन्हें रैग्वेड, मैरीगॉल्डस, डेजी और सम्बन्धित पौधों से एलर्जी होती है। इसके अलावा कुछ लोगों में स्टीविया खाने के दौरान सूजन और ऐंठन हो जाती है, हालांकि इसके बावजूद दुनिया भर में लोग स्टीविया को एक सुरक्षित और फायदेमन्द स्वीटनर मानते हैं।

शुगर फ्री टैबलेट के दुष्प्रभाव

शुगर फ्री गोलियां लंबे समय तक लेने से इनके साइड इफेक्‍ट भी संभव हैं, लेकिन ये जरूरी नहीं कि हमेशा ही इसके दुष्‍प्रभाव देखने को मिलें। हालांकि कुछ दुष्प्रभाव खतरनाक व गंभीर हो सकते हैं। अगर आपको किसी भी दुष्प्रभाव का पता चलता है और यदि ये खत्म नहीं होते हैं तो चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। इन गोलियों के दुष्‍प्रभाव के रूप में लोगों को अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, जोड़ों का दर्द, नसों का दर्द, थकान, चिंता, बहरापन, डिप्रेशन, सिरदर्द, स्मृति लोप, माइग्रेन, जी मिचलाना, न्युरैटिस, न्युरोपटी और सुन्नता का अहसास जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर

विवेकानन्द अस्पताल के डॉ. पीके शुक्ला का कहना है कि शुगर बॉडी के लिए जरूरी नहीं होती है। अगर लेना ही चाहते हैं तो दिनभर में इसकी 30 से 50 ग्राम मात्रा ले सकते हैं। इससे ज्यादा मात्रा लेने पर ग्लूकोज बढ़ जाता है। यह बॉडी में एडवांस ग्लाइकोसिलेशन एंड प्रोडक्ट नामक केमिकल बनाता है, जिससे किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

केजीएमसी की डॉ. सुदीप्ति (डायटीशियन) का कहना है कि कृत्रिम मिठास या चीनी मुक्त उत्पादों को खरीदने से पहले कार्बोहाइड्रेट के लिए भोजन लेबल देखें। यदि आप स्वाद पसंद करते हैं और आपका शरीर इसको अच्छी तरह से संभाल सकता है, तो यह शायद उपयोग करने के लिए ठीक है। निश्चित रूप से इसका स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि यह हानिकारक है, कम से कम मनुष्यों में।

डॉ. जावेद अहमद ने कहा कि डायबिटीज मरीजों के खानपान के लिए काफी रोक टोक हैं। मरीज से उसकी पसंद के भोजन और उसके द्वारा किए जाने वाले काम व दिनचर्या की जानकारी लेकर डाइट निर्धारित करनी चाहिए। हमें मरीज को डराना नहीं चाहिए। डॉक्टरों को चाहिए कि वह डायबिटीज मरीजों को पूरा समय दें। दवाओं के जरिये समस्या दूर की जा सकती है।

Related Post

भोपाल में सरकार के खिलाफ शिक्षकों का हल्लाबोल, मुंडन करा जताया विरोध

Posted by - January 13, 2018 0
भोपाल के जंबूरी मैदान में प्रदेशभर के अध्यापकों ने सरकार के विरोध में किया अनोखा प्रदर्शन भोपाल। पांच दिन पहले जिस…

5 मई : धनु वाले सूझबूझ से बाधाओं से पा सकेंगे पार, मकर बनाएं घूमने-फिरने का प्लान

Posted by - May 5, 2018 0
एस्ट्रो मिश्रा मेष : नापतौल कर कदम बढ़ाएंगे तो कॅरियर में सफलता मिलने की प्रबल संभावना है। दिमाग को इधर-उधर उलझाने…

कॉमेडी की डोज के साथ शुरू हुआ सुनील और शिल्पा का शो ‘दे धना धन’

Posted by - April 9, 2018 0
मुंबई। कॉमेडियन सुनील ग्रोवर-शिल्पा शिंदे का क्रिकेट कॉमेडी शो हाल ही में शुरू हुआ है। दर्शक इस शो का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आपको बता दें कि…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *