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मोमोज और नूडल्स परोस रहे ज़हर

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  • इनमें पड़ने वाला एमएसजीहै बेहद खतरनाक
  • खाने का स्वाद बढ़ाने वाला एमएसजी एक धीमा जहर
  • लखनऊ में रोजाना 50,000 मोमोज और 20,000 किलो नूडल्‍स की खपत

मुंबई, दिल्‍ली या लखनऊ की बात छोडि़ए, आज छोटे शहरों, कस्‍बों और गाँव तक में मोमो और चाउमीन छाया हुआ है। यह फ़ास्ट फ़ूड बच्चों से ज्यादा युवाओं की पहली पसंद बन चुका है। इन दो आइटम्स की खपत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अकेले लखनऊ में ही रोजाना करीब 50,000 मोमोज और 20 हजार किलो नूडल्स बिकते हैं। इस फ़ास्ट फ़ूड की लतडालने के लिए जिम्मेदार है मोनो सोडियम ग्लूटामेट या एमएसजी जिसे आम दुकानदार चायनीज पाउडरकहते हैं। डाक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि एमएसजी सेहत के लिए, खासकर बच्‍चों के लिए बहुत ही हानिकारक है। प्रस्‍तुत है the2is.com के लिए रजनीश राज  एवं  दीपाली अग्रहरी  की रिपोर्ट :  

मैगी, चाऊमीन, मंचूरियन, स्प्रिंग रोल समेत तमाम चाइनीज व्यंजनों में प्रयोग होता है एमएसजीया अजीनोमोटो (एक पॉपुलर ब्रांड नाम)। खाने का स्वाद बढ़ाने वाला यह मसाला वास्तव में एक धीमा जहर है, जो हमारी स्वाद ग्रंथियों को दबा देता है, जिससे हमें खराब खाने के स्वाद का पता ही नहीं चलता। मैदे से बने जिन मोमोज को आप रोज खाते हैं, वह सेहत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है, शायद ये आपको नहीं पता। मोमोज एक तो मैदे से बने होते हैं जिसके कई साइड इफेक्‍ट हैं और ऊपर से इसमें स्‍वाद बढ़ाने के लिए एमएसजी डाला जाता है।



मैदा गेहूं का बेहद रिफाइंड आटा होता है, जिसमें फाइबर (चोकर) नहीं होता। मैदे को सफेद और चमकदार बनाने के लिए इसे बेंजोइल पैरॉक्साइड से ब्‍लीच किया जाता है, जो बहुत हानिकारक होता है। चीन और यूरोप के देशों में बेंजोइल पैरॉक्साइड बैन है क्योंकि इससे स्किन कैंसर होने की ज्यादा आशंका होती है। यही कारण है जो लोग नियमित रूप से मैदे से बने मोमोज या अन्‍य चीजें खाते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होने लगती है।

ajinomoto
अजीनोमोटो

एमएसजीऔर इसके दुष्प्रभाव
एमएसजी की खोज 1909 में जापानी वैज्ञानिक किकुनाए इकेडा ने की थी। उन्‍होंने इसके स्‍वाद को ‘मामी’ के रूप में पहचाना, जिसका अर्थ होता है सुखद स्‍वाद। देखने में यह छोटे चमकीले क्रिस्‍टल जैसा होता है और इसका स्‍वाद नमक जैसा होता है। इसमें प्राकृतिक रूप से एमीनो एसिड पाया जाता है। इसका इस्‍तेमाल चाइनीज फूड, चिप्‍स, पिज्‍जा और मैगी बनाने के अलावा कई डिब्‍बाबंद फास्‍ट फूड, सोया सॉस, टोमैटो सॉस आदि में किया जाता है।वैज्ञानिकों के अनुसार एक किलो खाद्य सामग्री में 50 मिलीग्राम तक एमएसजीसुरक्षित है, लेकिन असलियत में हर दुकान या ठेले वाला अपने हिसाब से जितना मन करता है, एमएसजी का इस्‍तेमाल करता है। कहीं-कहीं तो दुकान वाले मुट्ठी भर अजीनोमोटो डालते हुए दिख जाते हैं। लगातार एमएसजीके सेवन से कैंसर, छाती में दर्द, चेहरे की मांसपेशियों पर तनाव जैसी गंभीर बीमारियों के साथ चेहरे, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों में सुन्नता और जलन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर से पीडि़त लोगों को यह बिल्कुल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ और घट सकता है।

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर

  • लखनऊ के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. राजेश गुप्ता बताते हैं कि मोमो बनाने में मैदे का इस्तेमाल होता है जिसमें फाइबर नहीं होता। साथ ही स्वाद को बढ़ाने के लिए मुट्ठी भरकर अजीनोमोटो भी डाला जाता है जिससे सिरदर्द, माइग्रेन जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं। मैदे को सफेदी के लिए बेंजोइल पैरॉक्साइड से ब्लीच किया जाता है जिससे कब्ज की समस्या हो जाती है।
  • लखनऊ के ही चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. मनोज सिंह ने बताया कि मोमो को जब पकाया जाता है तो मैदे से प्रोटीन निकल जाता है और ये एसिडिक बन जाता है। इससे शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। अजीनोमोटो का दुष्‍प्रभाव ये पड़ता है कि हारमोंस जल्दी डेवलप होने लगते हैं। मैदे में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है इसलिए मोमोज खाने से शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है जिससे डायबिटीज होने का खतरा हो सकता है। कुछ अध्ययन से पता लगा कि इसके सेवन से बच्चों के दिमाग और आंख पर भी असर पड़ता है।
  • हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. स्वाति ने बताया कि मोमोज में फाइबर नहीं होता जिससे इसे खाने से सिरदर्द, मिचली तथा गैस जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मैदा खाने से गठिया और हृदय संबंधी बीमारियां होने की आशंका भी होती हैं। मैदे के अत्‍यधिक सेवन से पेट में कब्‍ज की समस्‍या होने लगती है। यही नहीं, ज्‍यादा मात्रा में अजीनोमोटो खाने से मोटापा बढ़ने लगता है।

बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित

लखनऊ के मोमोज व्यापारी नवीन निगम का कहना है कि सस्ते और स्वाद के चक्कर में लोग घटिया क्वालिटी के मोमोज ज्यादा खाते हैं जो मात्र 10 से 20 रुपये में मिल जाता है। हर कोई ठेला लगाकर मोमोज और अन्य चाइनीज फ़ूड बेचने लगा है लेकिन उसमें पड़ने वाले सामग्री की मात्रा कितनी होगी ये नहीं जानते। दूकानदार अजीनोमोटो का भरपूर इस्तेमाल करते हैं जिससे खाने में स्वाद तो बढ़ जाता है, लेकिन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर इसका बुरा असर पड़ता है। बच्‍चे फास्‍ट फूड बड़े चाव से खाते हैं, लेकिन शोध में पाया गया है कि इसमें डाले गए अजीनोमोटो से हार्मोनल चेंज होते हैं। इसका नुकसान ये है कि यदि 12 साल का कोई बच्चा इसे खाए तो वह 15 साल के बच्चों की तरह व्‍यवहार करने लगेगा।

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नूडल्स

लखनऊ में रोजाना 20 हजार किलो की नूडल्स की खपत

आपको लखनऊ में किराने की हर दुकान में नूडल्स जरूर मिल जाएगा। अकेले राजधानी में ही रोजाना 20 हजार किलो नूडल्स की खपत का अनुमान है। आसानी से और जल्द तैयार हो जाने के कारण लोगों में इसकी चाहत बढ़ी है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जितनी वैराइटी अब नूडल्स में आ चुकी हैं, उतनी शायद ही किसी फास्ट फूड में हों। देश में नूडल्स की खपत इतनी है कि चीन, इंडोनेशिया व जापान के बाद आज चौथे नंबर पर भारत का नाम है।

यहियागंज थोक बाजार से होती है खरीदारी

यहियागंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष हरीशचंद्र अग्रवाल बताते हैं कि यहियागंज में दूसरे उत्पादों की तरह नूडल्स की थोक बिक्री भी होती है। नूडल्स की संगठित दुकानदारी न होने के कारण यह तय नहीं है कि वास्तव में कितनी बिक्री होती है, लेकिन इसमें दो राय नहीं कि नूडल्स की मांग बढ़ी है। यहियागंज के एक व्यापारी ने बताया कि यहां रोजाना नूडल्स के एक हजार से अधिक गत्तों की खरीद-फरोख्त होती है।

मोमो के खिलाफ विधायक चला रहे अभियान

सभी लोग सड़क पर बिकने वाले मोमोज को पसंद करते हैं और लेकिन बीजेपी के एक विधायक हैं जिन्हें मोमोज नापसंद है। मोमोज पर प्रतिबंध लगाने के लिए वह अभियान चला रहे हैं। जम्मू-कश्मीर से बीजेपी के विधान परिषद सदस्य रमेश अरोड़ा मोमोज की बिक्री बंद कराना चाहते हैं। उनका कहना है कि मोमोज में मोनोसोडियम ग्लूटामेट या अजीनोमोटो प्रचुर मात्रा में मिलाया जाता है, जो कैंसर का कारक है।



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