आविष्कार

पढ़ाई नहीं बनी खोज में बाधक

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  • सामान्य लोगों  ने भी  साबित किया आवश्यकता है आविष्कार की जननी
  • पांचवीं और 12वीं पास लोगों  ने बनाए किसानों के लिए उपयोगी उपकरण

कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। जमीनी स्तर पर हो रहे शोध कार्यों को देखें तो यह बात एकदम सटीक बैठती है। जरूरत के अनुसार नित नए इनोवेशन हो रहे हैं और इसको करने वाले ऐसे आम लोग हैं, जो अधिक पढ़ेलिखे भी नहीं हैं। उनके द्वारा किए गए शोध न सिर्फ व्‍यावहारिक जीवन में उपयोगी साबित हो रहे हैं, बल्कि उनकी प्रसिद्धि भी दूरदूर तक हो रही है। प्रस्तुत है  the2is.com के लिए रजनीश राज की रिपोर्ट :



इदरीश

आपको आमिर खान की फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ याद तो होगी ही, जिसके अंतिम दृश्य में कई ऐसे इनोवेशन को दिखाया गया था, जो अनूठे थे। इनमें से एक थी साइकिल चलित भेड़ों के बाल काटने की मशीन। यह कोई कोरी कल्पना नहीं है बल्कि असलियत में ऐसी मशीन बनी है । इस मशीन को बनाने वाले मो. इदरीश उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से हैं। इस मशीन से घोड़े, खच्चर, भेड़ व ऊंट के बाल बड़ी आसानी से काटे जा सकते हैं। अपने इस अनूठे आविष्कार के कारण उनको तृतीय ‘नेशनल ग्रासरूट टेक्नोलॉजी इन्नोवेशन एंड ट्रेडिशनल नॉलेज’ सम्मान मिल चुका है। उनको मिली लोकप्रियता ने ऐसे काम करने वाले लोगों के लिए उत्साह बढ़ाने का काम किया है।

12वीं पास विवेक ने बना डाला फ्यूल सेविंग डिवाइस

कौशाम्बी के विवेक कुमार पटेल सिर्फ 12वीं तक पढ़े हैं…तो क्या? उनके काम को सलाम कीजिए। पेट्रोल—डीजल की बढ़ती मांग को देखते हुए उनके मन में यह ख्याल आया कि काश, कोई ऐसा जादू हो जाए कि कम ईंधन में मशीन अधिक चले ! अगर ईंधन  कम खर्च होगा तो पैसे तो बचेंगे ही, साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी।

उन्होंने बनाया ऐसा डिवाइस जो इंजन से जुड़कर फ्यूल बचाता है। इस डिवाइस को इंजन में जोड़कर उन्होंने एक लीटर से 153 किमी बाइक चलाकर दिखाई। ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में काम करने से अधिक जरूरी उन्हें एग्रीकल्चर सेक्टर लगा, सो उन्होंने जनरेटर सेट में इस डिवाइस का उपयोग करना प्रारंभ किया। इसका लाभ यह मिला कि कम डीजल में जनरेटर अधिक देर तक चलने लगा। इससे फसलों की सिंचाई कम खर्चीली साबित हुई। विवेक अब अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर इसका कॉर्मिशयल उत्पादन करने की योजना बना रहे हैं।



सुरेंद्र

पांचवीं पास सुरेन्द्र ने गेहूं की फसल काटना बनाया आसान

संतकबीरनगर के रहने वाले और संत कबीर के भक्त सुरेन्द्र प्रसाद ने एक ऐसी मशीन ईजाद की, जिससे गेहूं की फसल काटना काफी आसान हो गया। उन्होंने ‘कम्बाइन हार्वेस्टर विद स्ट्रा मेकिंग मशीन’ का इनोवेशन किया, जिससे गेहूं काटने पर भूसा अलग हो जाता है।

इस मशीन की कई खासियतें हैं। यह नीचे से गरम नहीं होती है, जिससे मिट्टी में मौजूद मित्र कीटाणुओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इसके माध्यम से फसल को जमीन के पास से काटा जाता है, जिससे किसानों को फसल का पूरा लाभ मिलता है। उनको इस उपलब्धि के लिए वर्ष 2017 में राष्ट्रीय तृणमूल टेक्नोलॉजी नवप्रवर्तन एवं परम्परागत ज्ञान सम्मान समारोह में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। खास बात यह है कि सुरेन्‍द्र मात्र पांचवीं पास हैं, लेकिन हुनर उनके अंदर बेमिसाल है।

नव कुमार

मोटर मैकेनिक नव कुमार बने मूकबधिरों के लिए वरदान

लखनऊ का रानी कटरा, चौक। यहां रहने वाले नव कुमार अवस्थी वैसे तो मूक-बधिर मोटर कार मैकेनिक हैं, लेकिन उनकी प्रतिभा असाधारण है। मूक-बधिर होने के कारण अपने जैसे लोगों का दर्द वे अच्छी तरह से समझते थे। अपने कार्य के दौरान आ रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए उन्‍होंने मूक-बधिरों के लिए वाइब्रेशन मशीन का इनोवेशन किया। उन्‍होंने मूक-बधिरों को गाड़ियों की आवाज सुनने के लिए विजुअल इंडिकेटर वाले रिस्ट बैंड का निर्माण किया है। उनको इस खोज के लिए वर्ष 2017 में राष्ट्रीय तृणमूल टेक्नोलॉजी नवप्रवर्तन एवं परम्परागत ज्ञान सम्मान समारोह में सम्मान भी मिला है।

इनोवेशन में मदद करती है विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश में स्थित विश्वविद्यालयों, चिकित्सा विश्वविद्यालयों, कृषि विश्वविद्यालयों, पी.जी. कालेजों, शोध संस्थानों के माध्यम से विभिन्न शोध परियोजनाओं में मदद प्रदान की जाती है। परिषद के संयुक्त निदेशक व नवप्रवर्तन केंद्र के प्रभारी राधेलाल बताते हैं कि परिषद द्वारा आम लोगों में विज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न करने, उनमें तार्किक क्षमता और कल्पनाशीलता विकसित करने, वैज्ञानिक ढंग अपनाने व वैज्ञानिक जागरूकता उत्पन्न करने लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। साथ ही परिष्‍द द्वारा सेमिनार, सिम्पोजियम कार्यशालाओं के आयोजन एवं शैक्षिक/संगठित संस्थाओं को वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं के प्रकाशन हेतु भी सहायता प्रदान की जाती है।

मुख्य नवप्रवर्तन अधिकारी डॉ. आरडी गौड़ ने बताया कि परिषद में पेटेण्ट सूचना एवं बौद्धिक सूचना संरक्षण सम्बन्धी गतिविधियों के लिए भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से पेटेण्ट सेल स्थापित किया गया है। नए इनोवेशन को आगे बढ़ाने के साथ ही पेटेण्ट करने में भी उनको मदद प्रदान की जाती है।

अविष्कार करने वालों को पुरस्कार भी

नवप्रवर्तन अधिकारी संदीप द्विवेदी ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा विज्ञान को अधिक लोकप्रिय बनाने एवं इसमें रुचि जागृत करने, वैज्ञानिकों को सम्मान देने के उद्देश्य से विभिन्न पुरस्कार दिए जाते हैं। इनमें मुख्य हैं –  विज्ञान रत्न, विज्ञान गौरव, यंग साइंटिस्ट, साइंस शिक्षक एवं नव अन्वेषक पुरस्कार। विज्ञान के क्षेत्र में बच्चों में रुचि जागृत करने के उद्देश्य से विज्ञान विषयों में अधिकतम अंक पाने वाले कक्षा 10 व 12 के विद्यार्थियों को भी पुरस्कार दिए जाते हैं।

ऐसा होता है इनोवेशन या नव प्रवर्तन का मूल्यांकन

नव प्रवर्तन अधिकारी संदीप द्विवेदी ने बताया कि यहाँ आने वाले अविष्कारकों को निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन करना होता है । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तहत कार्यरत उप्र नव प्रवर्तन केंद्र को इनोवेशन या नव प्रवर्तन के जो भी प्रस्ताव प्राप्त होते हैं, उनको प्रारंभिक परीक्षण के लिए तकनीकी विशेषज्ञ व सलाहकार समिति को भेजा जाता है। उनकी रिपोर्ट सकारात्मक रहने पर उसे नव प्रवर्तन मूल्यांकन एवं क्रियान्वयन समिति के पास अनुमोदन व स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। इस समिति में अध्यक्ष व सचिव सहित नौ सदस्य होते हैं। समिति की संस्तुति के आधार पर प्राप्‍त प्रस्तावों को विकसित करने के लिए आवश्यक आर्थिक, तकनीकी एवं फिजिकल सहयोग भी प्रदान किया जाता है। श्री द्विवेदी ने बताया कि केंद्र को किसी माह दो तो कभी 10 से 15 प्रस्ताव इनोवेशन के मिलते हैं। इस प्रकार साल में औसतन ऐसे 100 प्रस्‍ताव आ जाते हैं। हालांकि वे बताते हैं कि कभी—कभी बे सिर-पैर वाले प्रस्ताव भी आ जाते हैं। ऐसे लोगों को समझा—बुझाकर भेज दिया जाता है।

देखिए लिंक :

http://www.dstup.in/content/333/130

http://nif.org.in/



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