सांपों के सच्‍चे दोस्त हैं मैसूर के ‘स्नेक श्याम’

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  • एमएस बालासुब्रमणियम अब तक 30 हजार से ज्‍यादा सांप पकड़कर छोड़ चुके हैं जंगल में

पेशे से ऑटो ड्राइवर, लेकिन शौक सांप पकड़ने का। इस शौक के चलते अभी तक वे 30 हजार से अधिक सांपों को पकड़ कर जंगल में छोड़ चुके हैं। कई बार उनको सांप ने काटा भी है, फिर भी उनका मानना है कि सांप इंसान से कम जहरीला होता है। हम बात कर रहे हैं स्नेक श्याम की। वैसे तो उनका असली नाम एमएस बालासुब्रमणियम है, लेकिन सांप पकड़ने के अपने अनूठे अभियान के कारण ही वे ‘स्नेक श्याम’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। प्रस्‍तुत है the2is.com के लिए रजनीश राज की रिपोर्ट :

अपने नाम और प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण एमएस बालासुब्रमणियम की अलग ही पहचान है। मैसूर (कर्नाटक) में 1967 में जन्‍मे स्‍नेक श्‍याम जब 13 वर्ष के थे, तभी से सांप पकड़ रहे हैं। 15 वर्ष का होते-होते उन्‍हें लोगों द्वारा बाकायदा सांप पकड़ने का बुलावा आने लगा। वास्तव में वे सांपों के सच्चे मित्र हैं। वे उन्हें पकड़ कर उनके मूल घर यानी जंगल में छोड़ आते हैं। वैसे पेशे से तो वह ऑटो ड्राइवर हैं और बच्चों को स्कूल पहुंचाने का काम करते हैं लेकिन समय मिलने पर वह सांप पकड़ने के अपने शौक को पूरा करते हैं। अब तक वे 32 हजार से अधिक सांप पकड़ चुके हैं।

उन्‍होंने स्‍थानीय स्‍तर पर पाए जाने वाले सांपों की 28-30 प्रजातियों की पहचान भी की है।  मार्च, 2017 तक उन्‍होंने 32,000 सांप पकड़कर एक रिकॉर्ड बनाया। वे मार्च, 2013 में मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन के मेंबर भी चुने गए। नेशनल जियोग्राफिक चैनल ने उनके ऊपर एक डॉक्‍यूमेंट्री भी बनाई है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लग जाता है कि उनके नाम पर एक सड़क का नाम भी है। उनका व्‍यक्तित्‍व भी बड़ा भव्‍य है – गले में रुद्राक्ष के साथ कई तरह की मालाएं, दसों उंगलियों में अंगूठी, कान में कुंडल और पश्चिमी हैट।

स्‍नेक श्‍याम सांप पकड़ने की कला बच्‍चों को भी सिखाते हैं। देशभर में उनके तीन हजार से भी अधिक छात्र हैं, जिनको वे सांप पकड़ने की कला सिखा रहे हैं। सांपों को पकड़ने की उनकी तकनीक अनोखी जरूर है लेकिन बहुत सरल और प्रभावी है। सांपों का महत्‍व बताते हुए वे कहते हैं कि सांप पर्यावरण के लिए बहुत आवश्यक हैं। वे चूहा और कुतरने वाले अन्‍य जानवरों की जनसंख्या में संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। वह बताते हैं कि प्रत्‍येक सांप एक साल में कम से कम 300 चूहों को खा जाता है, जिसके कारण किसानों की फसलें सुरक्षित रहती हैं। सांप काटने के मामले में सांप की प्रजातियों की पहचान करने के लिए कई अस्‍पताल वाले भी स्‍नेक श्‍याम को अपने यहां बुलाते हैं ताकि विष की पहचान के आधार पर सही इलाज कर सकें।



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