पैथोलॉजी

पानी को यूरीन बता दिया पैथोलॉजी लैब्स ने

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तमाम बीमारियों का पता पैथोलॉजी जांचों से चलता है और इसी के आधार पर इलाज होता है। लेकिन अगर जांच ही गलत हो तो? फिर न असली बीमारी पकड़ में आयेगी और न सही इलाज होगा।

सावधान हो जाइये, पैथोलॉजी लैब्स में यह भी हो रहा है। the2is.com ने पैथोलॉजी जांच की सच्चाई पता करने के लिए एक ‘यूरीन सैंपल’ की जांच लखनऊ की चुनिन्दा लैब्स में कराई। यह सैंपल असली यूरीन नहीं था बल्कि आरओ एर फिल्टर्ड पानी और पीला पोस्टर कलर का मिक्सचर था।

हमारी पड़ताल में पता चला कि लैब्स ने सामान्य पानी में वह जीवाणु खोज निकले जो यूरीन में सामान्यतः पाए जाते हैं। जब हमने लैब्स से बात की तो उनका जवाब था कि जांच एक स्टैण्डर्ड तरीके से होती है। इसमें मशीनों का उपयोग किया जाता है। दूसरी ओर डाक्टरों का कहना है कि इलाज लक्षण और जांच रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। अगर जांच रिपोर्ट में कोई संदेह लगता है तो दुबारा जांच करवाई जाती है। पैथोलोजिस्ट भी यह स्वीकार करते हैं कि कुछ जांच लैब्स गलत-सलत रिपोर्ट देती हैं।

क्या निकला जांच में

  1. यूरिन के रूटीन टेस्ट रिपोर्ट में एपिथेलियल सेल्स और पस सेल्स में 0-1/h।p।f मेंशन है ये यूरिन में इन्फेक्शन बताता है।
  2. दूसरी रूटीन रिपोर्ट में एपिथेलियल सेल्स और पस सेल्स ओकेजनल का होना साबित करता है कि जांच सही नहीं की गयी है|
  3. तीसरी रिपोर्ट में स्टेफीलोकोकस औरस का इन्फेक्शन मेशन है ये शरीर पर घाव में पाया जाने वाला इन्फेक्शन है जो यूरिन में नहीं होता|

एक्सपर्ट्स की राय

केजीएमयू के यूरोलौजिस्टडॉ विश्वजीत सिंह, डॉ. अपुल गोयल, डॉ. मनोज कुमार से हमने बात की तो इनका कहना था कि पैथोलॉजी में यूरिन, ब्लड के टेस्ट का एक रिपोर्ट फ़ॉर्मेट होता है| जब टेस्ट करते हैं तो सैंपल में जो भी चीज़ें पाते हैं उसकी प्रेजेंट और एब्सेंट को रिपोर्ट में मेंशन कर देते हैं|

डाक्टरों का कहना था कि कुछ लैब्स फर्जी टेस्ट रिपोर्ट बनाते हैं। डॉक्टर जो इलाज लिखते हैं लोग वह फॉलो करने लगते हैं| जिससे उन्हें नुकसान होना संभव है|

लखनऊ की पैथोलोजिस्ट डॉ। अर्चना सिंह स्वीकार करती हैं कि बहुत से पैथोलोजिस्ट गलत रिपोर्ट बनाते हैं।

सैंपल असली है या नहीं पता नहीं लगाया जा सकता| रिपोर्ट का फ़ॉर्मेट होता है| सैंपल में जो भी दीखता है उसे रिपोर्ट के फ़ॉर्मेट में मेंशन कर दिया जाता है|

डॉ अर्चना की राय : किसी एक पैथोलोजी पर टेस्ट पर निर्भर न रहें| डायरेक्ट पैथोलोजिस्ट से भी कांटेक्ट करें| रिपोर्ट गड़बड़ होने पर सी।एम।ओ। ऑफिस में कोम्प्लेन करें|

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी

लखनऊ के सी.एम.. जी.एस. बाजपाई और अडीशनल सी.एम.. एस. के रावत का कहना है कि पैथोलोजी लैब्स द्वारा होने वालेटेस्ट को वेरीफाई करने की जिम्मेदारी उस सेंटर के पैथोलोजिस्ट डॉक्टर की होती है। पैथोलोजिस्ट सेंटर रिपोर्ट गलत बनाते हैं तो ऑफिस से उनके पास जांच बैठायी जाती है और सख्त कार्यवाही भी होती है| एसोसिएशन द्वारा जागरूकता के कार्यक्रम चलाने का प्लान है।

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