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अल्पसंख्यकों को ऋण में 10.68% बढ़ोतरी

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  • 2014 से 2015 के बीच खातों की संख्‍या में 7% बढ़ोतरी
  • अल्‍पसंख्‍यकों को ऋण देने में देना बैंक सबसे फिसड्डी

 बैंक अब अल्पसंख्यक समूहों को ऋण देने पर पर्याप्‍त ध्यान दे रहे हैं। इन अल्पसंख्यक समूहों में सबसे अधिक ऋण लेने वालों में मुस्लिम समुदाय है। सबसे बड़ा बैंक होने के नाते भारतीय स्टेट बैंक अल्पसंख्यकों को कर्ज देने में सबसे आगे है। केंद्र की मोदी सरकार ने भी मार्च, 2015 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सलाह दी थी कि वे अल्‍पसंख्‍यकों को ज्‍यादा ऋण दें ताकि उन्‍हें उनकी जनसंख्‍या के अनुपात में कर्ज सुनिश्चित किया जा सके। पेश है ईशी आर्य की एक रिपोर्ट:

आबादी में वृद्धि के साथ विशेष रूप से अल्पसंख्यकों की वित्तीय जरूरतों के लिए बैंक अब बड़े पैमाने पर मदद के लिए आगे आ रहे हैं। अल्पसंख्यकों में कर्ज लेने वाले बैंक खातों की संख्‍या वर्ष 2014 में 1,11,46,581 थी, जो 2015 में बढ़कर 1,22,10,439 हो गई। यह वृद्धि 8.7% है। कर्ज देने की राशि में भी 2014 से 2015 के बीच 10.68% की अप्रत्‍याशित वृद्धि हुई है, जो कि कर्ज लेने वाले खातों की संख्या में वृद्धि से कहीं अधिक है। यह दर्शाता है कि पिछले वर्षों में प्रति व्यक्ति औसत कर्ज में बढ़ोतरी हुई है।



स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा मुसलमानों को दिए गए ऋण

वर्ष 2015 में अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के खातों की संख्या में लगभग 1.8% की वृद्धि हुई और वहीं कर्ज में दी गई धनराशि में 7.9% की बढ़ोतरी हुई जो पिछले वर्ष हुई वृद्धि से कम है। अल्पसंख्यकों में मुसलमानों में वर्ष 2014 में 57.31% खाते थे जो वर्ष 2015 में बढ़कर 58.03% हो गए। देना बैंक अल्‍पसंख्‍यकों को ऋण देने के मामले में सबसे फिसड्डी साबित हुआ है और यह सूची में सबसे नीचे है।

यही हाल ईसाइयों को ऋण देने में भी है। एसबीआई के पास सबसे ज्यादा खाते हैं और कर्ज देने की धनराशि भी सबसे अधिक है। वर्ष 2013 से 2015 के बीच उधार खातों की संख्या में वृद्धि 12.48% रही है और ईसाइयों को ऋण देने की धनराशि में 29.66% की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2013 से 2014 के बीच ऋण की धनराशि लगभग दोगुनी हो गई है। वहीं, वर्ष 2014 में सिख समुदाय के खातों की संख्या 3,52,293 से घटकर 3,09,944 हो गई, लेकिन वर्ष 2015 में यह तेजी से बढ़कर 3,14,796 हो गई।

जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों के खाते वर्ष 2013 से 2014 के बीच 5,72,914 से घटकर 4,63,941 रह गए लेकिन वर्ष 2015 में फि‍र इनकी संख्‍या बढ़कर 5,74,691 हो गई। 2015 में ऋण खातों में 19.27% की उल्‍लेखनीय बढ़ोतरी हुई। 2014 में खातों की संख्या कम होने के बावजूद ऋण की धनराशि में लगातार बढ़ोतरी देखी गई। देना बैंक के खातों की संख्‍या वर्ष 2013 में 42,562 थी जो 2014 में बढ़कर 48,381 हो गई। हालांकि वृद्धि की प्रवृत्ति लंबे समय तक नहीं रही और 2015 में खातों की संख्‍या घटकर 39,173 रह गई। अल्पसंख्यक क्षेत्र को उधार देने में अगर सबसे ख़राब बैंक कोई है तो वह देना बैंक है।

Source : https://data.gov.in/catalog/bank-wise-lending-minorities-under-priority-sector-lending



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