मदरसे

आधुनिक शिक्षा से दूर हैं मदरसे

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उत्तर प्रदेश में 18632 मदरसे हैं जिनमें से सिर्फ 3867 ही पंजीकृत हैं। 560 मदरसे सरकार से पैसा ले रहे हैं लेकिन वे अब भी दीनी तालीम पर ही ज्‍यादा जोर दे रहे हैं और आधुनिकीकरण की योजना की उपेक्षा कर रहे हैं।

सौजन्‍य त्रिपाठी/ धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

मदरसा या इस्‍लामी शिक्षा के केंद्र किसी भी तरह से आधुनिक नहीं कहे जा सकते हैं। इन मदरसों में छात्रों को धार्मिक शिक्षा ही दी जा रही है और इससे मदरसों के छात्रों को मुख्यधारा में लाने की केंद्र सरकार की योजना कुछ हद तक नाकाम हो गई है।



केंद्र सरकार की मदरसा आधुनिकीकरण योजना (जिसमें छात्रों को गुणवत्‍तापरक शिक्षा दी जानी है) को दरकिनार कर यूपी के मदरसों में उलेमा और मौलवी छात्रों को सिर्फ इस्लामी शिक्षा (दीनी तालीम) ही प्रदान कर रहे हैं। इस योजना के तहत मदरसों में अंग्रेजी, साइंस, गणित और कम्‍प्‍यूटर जैसे विषयों को पढ़ाने के लिए सरकार की ओर से बाकायदा फंड का प्रावधान है। सरकार इन विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को वेतन देने के लिए मदरसों को अनुदान देती है, लेकिन ज्‍यादातर मदरसे इस पैसे का ईमानदारी से इस्‍तेमाल नहीं करते हैं।या तो सिर्फ कागजों में ही टीचर रखे जाते हैं और सरकार से पैसा ले लिया जाता है या मदरसा चलने वाले लोग अपने भाई बंधुओं को टीचर रख कर ग्रांट ले लेते हैं. इसके अलावा बहुत से मदरसे तो सिर्फ कागजों में ही चल रहे हैं. यह खेल सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से ही चलता है.



मदरसे
image credit: jamiaagra.com

सरकारी धन का दुरुपयोग

उत्‍तर प्रदेश में 18632 मदरसे हैं जिनमें से 3867 यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड से पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 560 ऐसे संस्थानों को अनुदान दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने हाल ही में मदरसों में गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करने की योजना (एसपीक्यूईएम) के तहत 1, 000 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश की पिछली अखिलेश यादव सरकार ने भी मदरसों के लिए 777 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन नियमित रूप से वित्तीय अनुदान लेने के बावजूद इन संस्थानों में अंग्रेजी, विज्ञान, गणित इत्‍यादि जैसे विषयों को नहीं पढ़ाया जाता है।

ऐसी शिकायतें मिलने के बाद राज्य सरकार ने ऐसे सभी मदरसों में अनियमितता की जांच शुरू कराई थी, जो शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनुदान लेते हैं। संदेह जताया गया था कि इन संस्थानों में सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर अलीगढ़ में पंजीकृत 40 मदरसों में से 4 को सरकारी अनुदान मिलता है। यहां अनियमितता की शिकायतों के बाद जांच शुरू की गई है। वहीं आज़मगढ़ के 384 सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में से 3 तो केवल कागज़ पर चलते पाए गए जबकि 16 मदरसों में कोई प्रशिक्षित शिक्षक ही नहीं था।

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद (UPMSP) के अध्यक्ष काजी जैनुस साजिदीन कहते हैं कि इस्लामिक रूढ़िवादी गरीब मुस्लिम मातापिताओं को अपने बच्‍चों को केवल अपंजीकृत या बिना सरकारी सहायता प्राप्‍त मदरसों में ही भेजने के लिए मजबूर करते हैं, जहां सिर्फ मजहबी या दीनी तालीम दी जाती है। रूढ़िवादी मुस्लिमों को भय है कि इससे उनका धार्मिक महत्‍व और ओहदा कम हो जाएगा। एक पुलिस अधिकारी आरिफ सिद्दीकी का कहना है इसे मौलवियों की रूढि़वादिता ही कहेंगे कि वे धार्मिक शिक्षा का समर्थन करते हैं। हालांकि सरकार इस समुदाय के बीच व्‍याप्‍त निरक्षरता को दूर करने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन रूढि़वादिता और निजी स्‍वार्थ मदरसों की गिरती शैक्षणिक व्यवस्था को बदलने में मुख्य बाधा हैं।

लखनऊ के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के एक पदाधिकारी शमीम के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में मदरसे सिर्फ कागजों पर चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि 118 सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे सरकार से पैसा तो ले रहे हैं लेकिन वहां निर्धारित मानदंडों का पालन नहीं हो रहा है।

यूपी के मदरसों में छात्रों की संख्‍या

तहतानिया (कक्षा 1 से 5) – 8, 33,400

फौकानिया (कक्षा 6 से 8) – 5, 87,100

आलिया (कक्षा 8 से ऊपर) – 3, 75,296



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