अविनेश रेखी

मुकाबले में नहीं, खुद को बेहतर बनाने में है विश्वास

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यह कहना है लोकप्रिय टीवी कलाकार अविनेश रेखी का ! हाल ही में लखनऊ में अपने अगले टीवी सीरियल ‘तू सूरज मैं साँझ पियाजी’ के प्रमोशनल प्रोग्राम में आए अविनेश से बात की दीपाली अग्रहरी ने:

आपने बहुत अलग अलग  तरह के किरदार निभाए हैं। किसी भी नए किरदार को अपनाने में आपको क्या दिक्कतें आती हैं?

मुश्किल और आसानी से कोई रोल अडॉप्ट करना तो सबका पर्सनल होता है। कोई जल्दी कर लेता है तो कोई देर से और कोई नहीं भी कर पाता है। आने वाले सीरियल में जो किरदार मैं निभा रहा हूँ वो मेरे लिए काफी चैलेंजिंग है और इसमें फिट बैठने के लिए मुझे फिजिकल के साथ-साथ खुद को मानसिक रूप से  भी तैयार करना पड़ा।   फिर इसमें जो मेरी भाषा है वो शुद्ध हिंदी है, जिसके लिए मैंने हिन्दी की कई किताबें पढ़ीं और शब्‍दावली पर भी काफी काम किया। फिजिकल ट्रेनिंग के लिए डाइट प्लान और कई सारे अनुशासन से गुजरना पड़ा। हालांकि यह सब पहले भी करता था पर इस सीरियल के लिए कुछ ज्‍यादा ही करना पड़ा।

अविनेश रेखी
photo: Muqeed

सोनू सूद और शर्मन जोशी की तुलना में इस सीरियल के लीड रोल के लिए आपको चुना गया। इस पर आप कैसा महसूस करते हैं ? http://www.bollywoodlife.com/news-gossip/avinash-rekhi-and-sahil-anand-join-the-cast-of-diya-aur-baati-hum-2/

ये तो मेरे लिए आश्चर्य की बात है, जो मुझे आपसे ही पता चली है। अगर ऐसा कुछ है भी तो हर कोई अलग अलग होता है। वैसे भी वो दोनों अपने मुकाम पर पहुच चुके हैं और मुझसे काफी पहले से काम कर रहे हैं जबकि मुझे अभी बहुत  आगे जाना है। मेरी  हमेशा से यह सोच रही है कि दूसरे व्यक्ति से श्रेष्ठ होने में कुछ भी महानता नहीं है, असली महानता इस बात में है कि आप स्‍वयं को कितना बेहतर बना पाते हैं। जापानी भाषा में एक शब्द है “काईजन” जिसका मतलब है – “आत्म विकास/स्‍वयं में सुधार (निरंतर सुधार)”, और मैं इसी का अनुसरण करता हूँ। मैंने अपनी  पुरानी आदतों को बदल कर सुधार करना सीखा है। मैंने अपनी किसी और से कभी कोई तुलना नहीं की।

अविनेश रेखी
अविनेश रेखी

क्या आप किसी रोल मॉडल को फॉलो करते हैं ?

जी हाँ, मैं अपने मामा जी फॉलो करता हूँ, जो कि एक बिजनेस मैने है । उनका सिद्धांतवादी होना मुझे काफी प्रभावित करता है। उन्होंने ही मुझे किताबें पढ़ने की आदत डाली और जीवन में हमेशा लोगों और अपने काम के प्रति निष्ठावान रहने की सीख दी,  इसीलिए वो मेरे आदर्श हैं।

आप किस तरह का किरदार नहीं करना चाहेंगे, भले वो लीड रोल ही क्यों न हो ?

मैं हर तरह के किरदार निभाने में अपने आपको सक्षम महसूस करता हूँ। एक एक्टर जितना ही खुद को जानेगा, उसके लिए उतना ही अच्छा है।

क्या नेगेटिव रोल करने से आपको पॉजिटिव रोल मिलने में दिक्कत का सामना करना पड़ा?

मैंने दोनों ही तरह के किरदार निभाए हैं और इस समय एक पॉजिटिव रोल ही कर रहा हूँ। कभी ऐसा लगा नहीं कि मेरी कोई इमेज सेट हो गई है। अगर ऐसा होता तो मुझे ये रोल नहीं मिलता।

रील लाइफ से हटकर क्या आप अपनी रियल लाइफ में भी एक सीरियस व्यक्तित्व के मालिक हैं?

अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ तो हर कोई ओपन होता है और मैं भी हूँ। लेकिन हाँ, मैं थोड़ा अंतर्मुखी हूँ।  जब भी किसी नई जगह जाता हूँ तो अचानक सहमा-सहमा सा हो जाता हूँ। कम बोलता हूँ, ओवर फ्रेंडली नहीं हूँ। बहुत ज्यादा सामाजिक भी नहीं हूँ। मैं सेट पर भी ज्‍यादातर शांत ही रहता हूँ।

‘तू सूरज मैं साँझ पियाजी’ में अपने किरदार के बारे में कुछ बताइए ?

‘उमाशंकर’ का किरदार मेरे लिए नया है। वह बहुत सीधा और शिव भक्त है – धर्म में अखंड विश्वास रखता है। उसके अपने नियम हैं लेकिन वे सिर्फ स्वयं उसके और उसके परिवार तक ही सीमित हैं, वह बाकी लोगों को जाकर सुधारने की कोशिश नहीं करता है। वह एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है जिसका खुद का क्‍लीनिक है और वहां सिर्फ पुरुषों का इलाज़ होता है, स्त्रियों का नहीं। पराई स्त्री को छूना वह धर्म के खिलाफ मानता है।

आप हमारे पाठकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

हम उम्मीद रखते हैं कि आप नए सीरियल और उसके किरदारों को भी उतना ही प्यार और प्रोत्साहन देंगे जितना इसके पहले भाग ‘दिया और बाती हम’ को दिया था। अपनी ओर से मैं विश्वास दिलाता हूँ कि हम कलाकार भी पहले से अधिक मेहनत और लगन से काम करके आपको आनंदित करेंगे।

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