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हर राज्य के हिसाब से बने सौर उर्जा प्रोडक्ट

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एक अध्ययन में  WWF-India और  Selco फाउंडेशन ने राज्यों में अक्षय ऊर्जा पर अलग-अलग तरह के जागरूकता अभियान चलाने के सुझाव दिए

अनुवाद : धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में करीब 1.1 अरब लोगों तक बिजली पहुंची नहीं है | इनमें करीब 30 करोड़ तो भारतीय हैं | इसी तरह, पूरी दुनिया में करीब 2.9 अरब लोग खाना पकाने के लिए बायोफ्यूल जैसे उपले और लकड़ी पर निर्भर हैं। भारत इस चार्ट में भी सबसे ऊपर है, जहां करीब 80 करोड़ लोग अपनी रसोई गोबर के उपले, लकड़ी का कोयला या फसल के अवशेषों से चलते हैं। यानि भारत को ऊर्जा के मामले में अभी बहुत लंबा रास्‍ता तय करना है (सीईईडब्‍लू एक्‍सेस रिपोर्ट, 2015)। इसी को ध्‍यान में रखकर WWF-India और Selco फाउंडेशन ने यूपी और ओडिशा के ऐसे क्षेत्रों में एक अध्ययन किया जहां अक्षय ऊर्जा के कोई साधन नहीं हैं या बहुत थोड़े साधन हैं। अध्‍ययन से पता चलता है कि यूपी के लोगों में अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता ज्‍यादा है इसलिए यहां ऐसे उत्‍पादों की मरम्‍मत और मेंटिनेंस पर ज्‍यादा जोर दिया जाना चाहिए जबकि उड़ीसा में इसके प्रति लोगों में जागरूकता ही नहीं है या काफी कम है, इसलिए वहां इसको ध्‍यान में रखकर सरकार या कंपनियों को प्रोडक्‍ट लांच करना चाहिए।

WWF-India और Selco फाउंडेशन ने अपने अध्‍ययन में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत व लखीमपुर खीरी और ओडिशा के कोरापुट व कलाहांडी जिलों में यह जानने के लिए सर्वेक्षण किया कि इन क्षेत्रों में लोग अक्षय ऊर्जा के बारे में कितना जानते हैं। साथ ही उन्‍हें इसकी चुनौतियों और अवसरों की कितनी समझ है।



यूपी और ओडिशा में एनर्जी ईकोसिस्टम

सर्वेक्षण में पता चला कि यूपी में निचले तबके के लोगों में भी अक्षय ऊर्जा उत्‍पादों के बारे में काफी जागरूकता है, लेकिन यहां के बाजार उनकी आवश्यकतायें पूरी  नहीं कर पा रहे हैं। यही नहीं, उत्‍पादों के रखरखाव और उनकी मरम्‍मत की भी पर्याप्‍त सुविधाएं नहीं हैं। साथ ही, बाजार में अक्षय ऊर्जा से संबंधित जो उत्‍पाद उपलब्‍ध भी हैं, वे घटिया क्‍वालिटी के हैं और उन पर वारंटी भी नहीं है, खासकर सौर ऊर्जा से जुड़े उत्‍पादों में।

दूसरी तरफ ओडिशा में, लोगों में अक्षय ऊर्जा के प्रति बहुत कम जागरूकता है। वे यह भी नहीं जानते कि अक्षय ऊर्जा कितनी उपयोगी है और लकड़ी जलाने से क्‍या नुकसान हैं। उत्‍पादों के रखरखाव और मरम्‍म्‍त की समस्‍या यहां भी थी।

हालांकि सरकार ने लोगों को सौर ऊर्जा उत्‍पादों को मुफ्त में दिया था, लेकिन देखने में यही आया कि ज्‍यादातर घरों में ये उत्‍पाद बेकार पड़े थे और लोग लकड़ी पर ही खाना पका रहे थे।

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टेबल ईएस 1 में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और ओडिशा के जिलों में अक्षय ऊर्जा के इस्‍तेमाल से संबंधित प्रमुख बिंदुओं को दर्शाया गया है।

जैसा कि ऊपर दी गई टेबल से स्‍पष्‍ट है कि ओडिशा सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों में नवीकरणीय या अक्षय ऊर्जा के बारे में जागरूकता पैदा करना होना चाहिए। साथ ही बाजार में उच्‍च गुणवत्ता वाले उत्पाद की उपलब्‍धता और उनके रखरखाव व मरम्‍मत की उचित व्‍यवस्‍था होना भी जरूरी है, तभी लोग ऐसे उत्‍पादों की ओर आकर्षित होंगे। वहीं दूसरी तरफ उत्‍तर प्रदेश सरकार हालांकि अपने यहां ऐसे उत्‍पादों की उपलब्‍धता सुनिश्चित कराने में सफल रही है और मांग और आपूर्ति के अंतराल को काफी कम किया है लेकिन इन उत्‍पादों के रखरखाव व मरम्‍मत में मुश्किल न आए और गुणवत्‍ता वाले उत्‍पाद मिलें, इस पर सरकार को ध्‍यान देना होगा।     

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रोडमैप

ऊपर दिए गए चित्रों और टेबल के माध्‍यम से हमने यह दिखाने का प्रयास किया है कि उत्‍तर प्रदेश और ओडिशा में वर्ष 2014 में अक्षय ऊर्जा के रूप में जैव और सौर ऊर्जा की कितनी क्षमता थी और उसके अनुपात में हमने वर्ष 2015 में उसका कितना हिस्‍सा इस्‍तेमाल किया। जाहिर है, इसके आधार पर हम कह सकते हैं कि अक्षय ऊर्जा के इस्‍तेमाल के लक्ष्यों को प्राप्‍त करने के लिए एक मजबूत नीति और नियामक संस्‍था का होना बहुत जरूरी है। हालांकि अक्षय ऊर्जा उत्पादों और उसकी सेवाओं के इस्‍तेमाल पर टैक्‍स में छूट मिलती है, बैंक ऐसी योजनाओं के लिए धन उपलब्‍ध कराते हैं और ऋण भी देते हैं, इसके बावजूद इन उत्‍पादों की खरीद की टेंडर प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत है। टेंडर पास करते समय कंपनियों के कम रेट को महत्‍व देने की बजाय इस बात पर ध्‍यान देना चाहिए कि किस कंपनी के उत्‍पाद की गुणवत्‍ता और उनके रखरखाव और मरम्‍मत की सुविधा बेहतर है।

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ऐसी योजनाओं में सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि को बढ़ावा देकर और मौजूदा आदिवासी, जंगल और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में लोगों को अक्षय ऊर्जा की विशेषताएं बताकर हम ऊर्जा इस्‍तेमाल के लिए आदर्श संरचना का निर्माण कर सकते हैं।

For more details please refer to http://www.selcofoundation.org/publication/view/deployment-of-decentralized-renewable-energy-solutions-an-ecosystem-approach/


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