• सोलर माइक्रो ग्रिड लगाकर ग्रामीणों को सौर ऊर्जा के लिए किया प्रेरित
  • स्‍वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं के जीवन में लाई खुशहाली

उत्तर प्रदेश के उन्नाव की यह फूलन देवी एक ऐसी महिला हैं जिनका उद्देश्‍य है ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव लाना। वह इस बात में विश्‍वास करती हैं कि ‘आशा और दृढ़ संकल्प कभी आपको नीचे नहीं जाने देते।’ The2is.com संवाददाता फराह जेहरा बता रही हैं फूलन के संकल्‍प और उनकी दृढ़ता की कहानी:

उन्नाव जिले में एक अनाम सा गांव है आंठ, जहां अर्धसाक्षर फूलन देवी रहती हैं। संघर्षों और दुश्‍वारियों भरा जीवन गुजारने के बावजूद फूलन ने अपने घर में एक सोलर माइक्रो ग्रिड लगाने की पहल की, ताकि उसे देखकर दूसरों को भी प्रेरणा मिल सके। ग्राम प्रधान फूलन देवी की प्रशंसा करते नहीं थकते। वे कहते हैं, ‘फूलन देवी हम सबके लिए एक प्रेरणा हैं। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उनकी पहल सराहनीय है।’ अब ग्राम प्रधान सहित गांव के लोग फूलन देवी के घर अपने डोंगल (सौर विद्युत के लिए इस्तेमाल होने वाला उपकरण) रिचार्ज करने के लिए ले जाते हैं ताकि उनके घर भी रोशनी से जगमगा सकें।



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फूलन देवी अपने पति के साथ

फूलन देवी ने न केवल सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पहल की बल्कि उन्‍होंने गांव की महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) बनाने की भी शुरुआत की। अब वह विभिन्न गांवों के ऐसे 25 स्‍वयं सहायता समूहों का प्रबंधन करती हैं। इन स्‍वयं सहायता समूहों के माध्यम से एकत्र धन का इस्‍तेमाल गांव की गर्भवती महिलाओं, बीमार बच्चों और महिलाओं की समग्र स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जाता है। इन समूहों के सदस्य 100 रुपये महीने जमा करते हैं और जब भी किसी परिवार को पैसे की ज़रूरत होती है तो उन्हें एकमुश्त राशि दे दी जाती है। फूलन कहती हैं, ‘हमारे समाज में विभिन्न आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोग हैं। इस समूह के माध्यम से हम लोगों को एक समान स्तर पर लाने की कोशिश करते हैं। अगर किसी गांव में एक परिवार अपनी बेटी की शादी करना चाहता है, लेकिन वह ऐसा करने में समर्थ नहीं है तो समूह में जमा धनराशि देकर उस परिवार की मदद की जाती है। फूलन पुरानी यादें ताजा करते हुए बताती हैं कि शुरुआत में महिलाओं को समूह में शामिल होने के लिए राजी करना बड़ा मुश्किल काम था लेकिन अब स्थिति बदल गई है।



कोलकाता से उन्‍नाव का सफर

फूलन देवी का जन्म कोलकाता में हुआ था। जब वह सिर्फ 9 वर्ष की थीं, तभी उनके माता-पिता का निधन हो गया। परिवार में कोई और न होने के कारण फूलन एकदम अकेली हो गईं और उन्‍होंने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। लेकिन शायद होनी को कुछ और मंजूर था। जब उनको होश आया तो उन्‍होंने खुद को पंजाब के एक रेलवे स्टेशन पर कुछ रहस्यमय पुरुषों से घिरा पाया। वे फूलन को कुछ जगहों पर ले गए और उसे वेश्यावृत्ति में धकेलने की कोशिश की। किसी तरह वह उनके चंगुल से भागने में कामयाब रहीं। खुद को निराशा के अंधेरे में घिरा देख फूलन ने रेल पटरियों पर लेटकर अपना जीवन समाप्त करने की कोशिश की। लेकिन रेलवे स्टेशन पर मौजूद दुकानदारों ने उन्‍हें बचा लिया और एक आश्रय गृह में ले गए। वहां उन्होंने नए सिरे से जीवन शुरू किया और अंततः उन्नाव के एक मजदूर से शादी कर ली। शादी के बाद वह उन्नाव में ही बस गईं लेकिन कुछ साल बाद ही उनके पति की घातक बीमारी से मृत्यु हो गई। इसके बाद उन्‍होंने अपने पति के चचेरे भाई से शादी कर ली जो मानसिक रूप से कमजोर था।

अपनी जीविका चलाने के लिए फूलन देवी ने अपने घर में ही किराने की दुकान शुरू की और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करना शुरू कर दिया। वह घर का खर्च चलाने के लिए एक फैक्ट्री में भी काम करती हैं। अब फूलन देवी न केवल अपना घर-बार और व्यवसाय संभालती हैं बल्कि विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ी हैं। गांव में उन्‍हें बहुत सम्‍मान से देखा जाता है। गांव के लोग न केवल उनका बहुत आदर करते हैं बल्कि हर कोई उनके फैसलों का सम्मान और पालन करता है। वह अपने गांव और आसपास के क्षेत्र के राजनेताओं से भी निकटता से जुड़ी हैं। अब वह अपने गांव में पक्‍की सड़क और स्कूल खुलवाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।