• आरुषि मर्डर मिस्ट्री में नया मोड़, सीबीआई ने दी तलवार दंपति की रिहाई को चुनौती

दिल्ली नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने पिछले साल इस मामले में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने इस केस में सुबूतों के अभाव में आरुषि के पिता राजेश तलवार और मां नूपुर तलवार को बरी कर दिया था। सीबीआई ने अपनी अपील में कहा है कि निचली अदालत का फैसला सही था और हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार कर दिया, जो सही नहीं है।

इस मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ ने 12 अक्टूबर, 2017 को अपना फैसला सुनाते हुए दोनों को दोषी नहीं माना था। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि सीबीआई की जांच में कई कमियां हैं। मामले में तलवार दंपति को संदेह का लाभ दिया गया था। न्‍यायालय ने अपने फैसले में कहा कि मां-बाप राजेश और नूपुर तलवार ने आरुषि को नहीं मारा। इस मामले में आरोपी दंपति डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत की ओर से उम्रकैद की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।

सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि एजेंसी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तलवार दंपति की रिहाई को चुनौती दी है। ऐसे में तलवार दंपति की मुश्किलें फिर एक बार बढ़ सकती हैं। इससे पहले हेमराज की पत्नी ने गत दिसंबर में ही सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

क्या है मामला

नौ साल पूर्व 15-16 मई, 2008 की रात जब 14 वर्षीय आरुषि तलवार की हत्या हुई थी तब यह सवाल उठा था कि हत्यारा आखिर है कौन? मामले की जांच शुरू हुई और जांच एजेंसी की बदलती थ्योरी और उस पर उठते सवालों के बीच यह केस आगे बढ़ता चला गया। हालांकि शुरुआत से लेकर आखिर तक यह केस मिस्ट्री बना रहा और अब भी यह सवाल कायम है कि आखिर आरुषि की हत्या किसने की?